विशेष संदेश: सत्ता चाहिए तो नंदवंशी बनो, सैन-सवितानंद तो हम हैं ही !
सत्ता चाहिए तो नंदवंशी बनो, सैन-सवितानंद तो हम हैं ही !
मित्रों, अगर सत्ता चाहिए तो नंदवंश को अपना आदर्श (आइडियल) बनाइए; क्योंकि हमारे प्रेरणास्रोत जैसे होते हैं, हमारी सोच भी वैसी ही बनती है। श्री सैन सविता महाराज हमारे भगवान हो सकते हैं, जननायक कर्पूरी ठाकुर जी अपनी ईमानदारी के कारण हमारे महापुरुष हो सकते हैं, लेकिन हमारे राजनैतिक आदर्श महापवा नंद ही होने चाहिए।
महापद्म नंद ने न केवल प्रथम चक्रवर्ती सम्राट बनने की उपलब्धि हासिल की, बल्कि सामाजिक न्याय की ऐसी मजबूत बुनियाद रखी कि नंदवंश के बाद मौर्य वंश के उदय में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हुई। जो काम देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू होने के बाद हुआ, वह काम महापद्म नंद ने ईसा पूर्व 362 में ही कर दिखाया था। उनके कार्यकाल में तमाम सामंत्ती ताकतें ध्वस्त हुई और वास्तविक सामाजिक न्याय की व्यवस्था लागू हुई।
इसी तरह, महात्मा बुद्ध ने देश को शांति का संदेश देकर वह ऐतिहासिक कार्य किया, जिसे तमाम कोशिशों के बाद भी मिटाया नहीं जा सका। आज भी जहाँ खुदाई होती है, बुद्ध के अवशेष नज़र आते हैं। स्थिति यह है कि देश के प्रधानमंत्री हों, राष्ट्रपति हों या नीता अंबानी, विदेशों में तथागत गौतम बुद्ध का नाम लिए बिना नहीं लौटते।
इसलिए, यदि हमारे सभी साथी सत्ता में आना चाहते हैं और एक निष्पक्ष शासन चलाना चाहते हैं, तो नंदवंश को अपना आदर्श मानकर आगे बढ़ें।
विनेश ठाकुर कर्पूरी,
संपादक (विधान केसरी)
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