जिंदा हैं तो जिंदा दिखाई दो — संघर्ष और हिस्सेदारी की नई पुकार “जिंदा हैं तो जिंदा दिखाई दो, और ‘जिंदाबाद कराओ’ करना बंद करो।”
जिंदा हैं तो जिंदा दिखाई दो — संघर्ष और हिस्सेदारी की नई पुकार
“जिंदा हैं तो जिंदा दिखाई दो, और ‘जिंदाबाद कराओ’ करना बंद करो।”
यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि उन करोड़ों वंचित, अतिपिछड़े, अतिदलित, श्रमिक, किसान, युवा और महिलाओं के आत्मसम्मान की आवाज है, जो वर्षों से केवल नारों और वादों के सहारे राजनीति का हिस्सा तो बने रहे, लेकिन सत्ता और निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रखे गए।
जन सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनेश ठाकुर ‘कर्पूरी’ का मानना है कि समाज का वास्तविक उत्थान तभी संभव है, जब लोग केवल किसी नेता या दल के समर्थन में नारे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अधिकारों, हिस्सेदारी और नेतृत्व के लिए स्वयं आगे आएं। इतिहास गवाह है कि जो समाज संगठित हुआ, उसने सत्ता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की और अपने भविष्य को स्वयं तय किया।
आज देश की राजनीति में अतिपिछड़े और अतिदलित समाज की संख्या बड़ी है, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में जन सेवा दल सामाजिक न्याय, समान अवसर और राजनीतिक हिस्सेदारी के मुद्दे को केंद्र में रखकर एक नया जनआंदोलन खड़ा करने का प्रयास कर रहा है।
विनेश ठाकुर का कहना है कि अब समय केवल तालियां बजाने या दूसरों को आगे बढ़ाने का नहीं, बल्कि अपने समाज के बीच जाकर जागरूकता फैलाने, संगठन को मजबूत करने और नेतृत्व तैयार करने का है। यदि समाज अपने बल पर संगठित होगा, तो सत्ता और सम्मान दोनों प्राप्त करेगा।
जन सेवा दल का संदेश स्पष्ट है—
“अपने जैसे पीड़ितों से नजदीकी बढ़ाओ, हिस्सेदारी की गारंटी लेकर जुड़ जाओ और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाओ।”
यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और राजनीतिक भागीदारी का संघर्ष है। आने वाले समय में जन सेवा दल देशभर में जनजागरण अभियान चलाकर वंचित समाज की आवाज को और मजबूत करने का कार्य करेगा।
“अब शुरुआत है, मंजिल अभी बाकी है।
जो समाज जागेगा, वही आगे बढ़ेगा और सत्ता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।”
— विनेश ठाकुर ‘कर्पूरी’
राष्ट्रीय अध्यक्ष, जन सेवा दल
यह खबर साझा करेंShare this News