लालू और बापू की चर्चा
लालू और बापू की चर्चा
अरे ओ ललुआ हां बापू यार देश में उन लोगों ने पार्टी बनाकर मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बनने का सपना देखना शुरू कर दिया है जिन्हें कोई पूछने वाला नहीं था अचानक ऐसा क्या हुआ कि छोटी छोटी जातियों में एकता होने लगी जबकि हम तो पहले से ही एक मानते रहे हैं।
ललूआ अरे बापू कहावत है कि लकड़ी की हांडी एक बार चढ़ती है लेकिन हम तो आजादी के बाद से अब तक चढ़ाते रहें हैं बापू अब तो सांप निकल चुका है लाठी पीटने से कुछ होने वाला नहीं है उस समय कहां थे जब डाक्टर अम्बेडकर ने संविधान में ऐसी व्यवस्था कर डाली और हम इसी गलतफहमी में रहें कि ये लोग संख्या में भले ही नव्वे प्रतिशत हो लेकिन सत्ता में आने की नहीं सोचेंगे।
बापू
अरे ललुआ डाक्टर साहब ने जो व्यवस्था बनाई थी हमने उसी समय सोच लिया था कि संविधान में कुछ भी लिखले लेकिन सत्ता में तो ये कभी आ नहीं पाएंगे और जब प्रधानमंत्री मंत्री हम रहेंगे तो कौन संविधान में लिखें को लागू करा पाएगा, इस लिए हमने कई दशक तक ओबीसी आरक्षण भी लागू नहीं होने दिया और ना ही किसी को प्रधानमंत्री मंत्री बनने दिया अब हमें क्या पता था कि हमारे बीच के ही बीपी सिंह प्रधानमंत्री बनकर ओबीसी जातियों को भी आरक्षण लागू कर हमारे सिर पर बैठा देंगे, एक तो पहले से ही प्रथम सरकार ने एस सी एसटी जातियों को 21 प्रतिशत आरक्षण देकर हमारी योजना पर पानी फेर दिया था अच्छा हुआ प्रथम प्रधानमंत्री ने ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया और जांच कमेटी बनाकर सर्वे में उलझाकर काफी समय काट दिया वरना जो बात आज राजकुमार भाटी चंद्रशेखर विनेश ठाकुर मायावती राजभर निषाद बाल्मीकि कोरी लोधी पाल प्रजापति सैनी कश्यप विश्वकर्मा कर रहे हैं वह आजादी के बाद ही शुरू हो गई होती।
ललूआ
लेकिन बापू यह गलत तो था ही जिन्होंने तमाम सामाजिक आर्थिक शैक्षणिक शोषण बर्दाश्त किया और उनकी आबादी भी नव्वे प्रतिशत रही उसके बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री और बड़ी अदालत में जज न बनने देना अन्याय नहीं तो और क्या है इसी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है कि आज ये लोग तुम्हारी बेईमानी के कारण न सिर्फ शासन सत्ता
में बैठने की व्यवस्था बनाने में कामयाब होते दिखाई दे रहे हैं बल्कि हमारे द्वारा फसाऐ गए धार्मिक कट्टरवाद से दूर भागने लगे हैं।
ललूआ ये बता अब इस संकट का हल क्या है।
ललूआ
बापू कलम और डायरी निकाल कर लिख लें कि इसका सिर्फ एक ही उपाय है कि ये लोग आज तक तमाम उत्पीड़न भेदभाव झेलने के बावजूद पुरानी बातों को भूलकर जन संख्या अनुपात में हिस्सेदारी चाहते हैं जब इनकी संख्या नव्वे प्रतिशत है तो इनका न सिर्फ शासन सत्ता बल्कि न्यापालिका कार्यपालिका विधायिका और मीडिया में भी नव्वे प्रतिशत हिस्सा बनता है और हां यहां यह भी समझने की आवश्यकता है हम सब भारत माता के बेटे हैं और देश की प्रत्येक व्यवस्था जैसे धन धरती शिक्षा सम्मान में सबका बराबर हिस्सा बनता है वरना बापू हमारा भविष्य अपमानजनक हो सकता है।
बापू
हां ललूआ एक और प्रयोग करके देख रहे हैं जातिगत जनगणना कराना मजबूरी हो गया था खूब टाला लेकिन टल तो नहीं सका हमने उसमें से सर्वाधिक जनसंख्या वाले ओबीसी का कॉलम ही गायब कर दिया जिसके लिए तमाम ओबीसी सांसद तो हमारी व्यवस्था से सहमत हैं लेकिन दर्जनों ओबीसी कालम रखने की मांग जो जायज भी थी लेकिन यार करें क्या पहले ही एस सी एसटी की जनसंख्या ओपन होने से वैशाखियों पर चलना पड़ता है यदि ओबीसी को अपनी संख्या का पता चल गया तो मैं प्रधान भी नहीं बन पाऊंगा हालांकि हमारा प्रयास है कि दस पांच साल और कट जाए लेकिन यार काशीराम ने ऐसी जागरूकता फैलाई है कि उनके मरने के बाद भी खत्म होने की जगह दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रही है भईया हमारा काम तो इन जातियों को आपस में विरोधाभास पैदा रखकर बांटे रखना है ज्यादा करें तो मंत्री विधायक सांसद मुख्यमंत्री राष्ट्रपति भी बना देंगे लेकिन यह फामूर्ला कितने साल चलेगा यही देखना है। और हां लास्ट में हमारे पास हमारी बड़ी सहयोगी कांग्रेस बैठी है हमने काशीराम द्वारा तैयार किए गए लोगों को पदों का लालच देकर उनके साथ लगा दिया है देखना उसने पहले भी इनको आगे नहीं आने दिया हम जाएंगे तो वो आएंगे क्योंकि जो दल राज्य स्तर पर खड़े होते हैं जैसे सपा बसपा
कांग्रेस आरजेडी जेडीयू ममता सुहेलदेव निषाद अपना दल लोकजनशक्ति जितने भी है उनका टारगेट प्रधानमंत्री बनने का होता ही नहीं है उन्हें तो मुख्यमंत्री की कुर्सी चाहिए मुझे उम्मीद है कि इनकी संख्या कितनी भी हो लेकिन लालच भी कम नहीं है और इनकी पार्टी में ही किसी की हिम्मत जो इन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़कर प्रधानमंत्री बनने का सुझाव दें दें।
ललूआ
मान गए बापू आप लोग इनको कभी आगे नहीं आने दोगे ये कितना भी आईएएस आईपीएस मंत्री विधायक सांसद गवर्नर राष्ट्रपति जज या धनपति अथवा अम्बेडकर वादी बन जाए लेकिन निजी लालच से मुक्त होने वाले नहीं हैं लेकिन बापू इतनी बड़ी योजना तो अमेरिका इंग्लैंड जर्मनी चीन भी दुश्मनों से बचकर रहने में नहीं लगाता होगा जितनी आप लोग इन्हें रोकने के लिए तैयार रखते हैं बिल्कुल भईया यदि इन्हें मौका मिला तो ये हर कोई चक्रवर्ती सम्राट रहे हैं सौ साल रहकर भी मौका नहीं आने देंगे। वो तो भला हो काशीराम जी का की इनमें सत्ता की इतनी भूख जगा गए कि एक ही जाति में पांच पांच मुख्यमंत्री बनने वाले हैं जैसे सैनी समाज में स्वामी प्रसाद मौर्य बाबू सिंह कुशवाहा केशव देव मौर्य, टी प्रसाद शाक्य एक ही जाति में काम करते हैं ठीक उसी तरह बहनजी चंद्रशेखर रामदास उदित राज चिराग मांझी सहीत तमाम नेता हैं जिनके समाज को दुश्मन की आवश्यकता नहीं है ऐसे ही राजभर निषाद लोधी कश्यप विश्वकर्मा बाल्मीकि कोरी में दर्जनों नेता हैं जो अपनी जुगाड़बाजी के लिए संकल्पित होकर काम करते हैं।
लेखक विनेश ठाकुर कपूरी राष्ट्रीय अध्यक्ष
जन सेवा दल
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